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काव्य कुंज

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विधा तारीख

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किसी का मिलना, जीवन की कोई साधारण घटना नहीं होती… कभी-कभी कोई इंसान हमारे भीतर ही छुपे एक नए इंसान को जन्म दे जाता है। वह तुम्हें बदलता नहीं, बस उस सत्य से मिला देता है जिससे तुम उम्र भर अनजान रहे होते हो। साथ का अर्थ सिर्फ साथ चलना नहीं… कभी-कभी दो लोग मिलते हैं, एक-दूसरे में उतरते हैं, और फिर समझ आता है कि भीतर का कोई कोना बरसों से यूँ ही पड़ा था… जैसे बंद खिड़की पर धूप के इंतज़ार में रखा कोई दीपक। और फिर कोई आता है… सूरज की तरह नहीं, बल्कि उस पहली किरण की तरह जो बंद खिड़की के भीतर पड़े दीपक को यह एहसास करा दे— कि रोशनी अभी बाकी है।
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