Logo

काव्य कुंज

A+
A-
🌙
विधा तारीख

पिता का वात्सल्य

बेटी, तू मेरे जीवन का स्वर्णिम प्रकाश है, तेरी हँसी में ही मेरा हर सुख-विलास है। तेरी किलकारी से ही आँगन महकता है, तेरी मासूम आँखों में मेरा सारा जग सिमटता है। तेरे नन्हे कदमों की आहट जैसे वीणा की तान, तेरी मुस्कान से खिल उठता मेरा सूना मकान। तू जब हाथ पकड़कर मुझसे बातें करती है, समय ठहर-सा जाता है, धड़कन बढ़ जाती है। जब कभी तू दुःखी होती, मेरा दिल रोता है। तेरे आँसुओं से मेरा मन भीग जाता है, मेरे कंधे पर सर रख कर तू जब सो जाती , तब दुनिया भर की थकान, यूँ ही खो जाती है। बेटी, तू एक वरदान, तू मेरा गर्व है, तेरी हर एक खुशी ही मेरा सर्वस्व है। जीवन के हर मोड़ पर मैं तेरा संबल बनूँ, तेरे हर कदम पर मैं छाया-सा साथ रहूँ।

कलमकार

खिरसिन्धु साहू

✨ Editor's Choice