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काव्य कुंज

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विधा तारीख

गुरु - ज्ञान का सागर

गुरु चरणों में है स्वर्ग धाम गुरु शरण में है चारों धाम गुरु की सेवा में है रैन दिन गुरु को है कोटि प्रणाम।। गुरु चरणों का अमृतपान शीश झुका करते हैं गान गुरु जन्म के भाग सुधारे गुरु को है कोटि प्रणाम।। गुरु सीखने चुनौतियों से लड़ना कदम-कदम पर आगे बढ़ाना सही गलत की राह बताते गुरु को है कोटि प्रणाम।। गुरु सीखाते विश्व इतिहास गुरु ही देते भविष्य का ज्ञान वर्तमान में रहे हमेशा।। गुरु को है कोटि प्रणाम।।

कलमकार

श्रीमती विभा सोनी शिक्षिका शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला जांजी बिलासपुर

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